बिजावर/छतरपुर/सागर। सांदीपनी स्कूल भवन के निर्माण में व्यापक गड़बड़ियों और घटिया निर्माण की शिकायतें मीडिया में सामने आने के बाद प्रशासनिक अमला रविवार को अवकाश के दिन स्कूल भवन का निरीक्षण करने पहुंचा। जांच के दौरान भवन में जगह-जगह लीकेज, क्रैक, अधूरे कार्य और अन्य निर्माण संबंधी कमियां सामने आईं। हालांकि, जांच की जिम्मेदारी उसी विभाग के अधिकारी को सौंपे जाने से जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कार्रवाई नहीं होने पर स्कूली बच्चों द्वारा बड़े प्रदर्शन की तैयारी किए जाने की बात सामने आ रही है।रविवार को मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के मैनेजर विशाल शर्मा, शिक्षा विभाग के एपीसी सुधीर नामदेव, प्रभारी बीईओ प्रकाश चंद्र चौरसिया, सहायक यंत्री पीसी तिवारी, उपयंत्री राजेश चौबे और अजय गुप्ता सहित अन्य अधिकारी सांदीपनी स्कूल भवन पहुंचे और निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों के मौन रहने को लेकर भी सवाल उठे।
भवन निर्माण में गड़बड़ी की जांच की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के मैनेजर को दिए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत के चलते अधूरे एवं घटिया निर्माण के बावजूद भुगतान कराया गया। इन्हीं आरोपों के बीच जांच अधिकारी द्वारा निर्माण एजेंसी का बचाव किए जाने की बात भी सामने आई है।

निरीक्षण के दौरान भवन के कई कमरों में पानी रिसने की समस्या को मैनेजर विशाल शर्मा ने मुख्य रूप से पाइप लीकेज से जुड़ी समस्या बताया और एक सप्ताह में ठेकेदार से सुधार कराने की बात कही। जबकि स्कूल प्रबंधन का कहना है कि कई स्थानों पर पाइप नहीं होने के बावजूद दीवारों, बीम और अन्य हिस्सों से पानी रिस रहा है।मैनेजर ने यह भी कहा कि भवन हैंडओवर के समय पूरी तरह दुरुस्त था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि हैंडओवर के महज तीन माह बाद भवन में इतनी गंभीर कमियां सामने आ गईं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

तीन माह में खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल

करीब 33 करोड़ रुपये की लागत से बने सांदीपनी स्कूल भवन का निर्माण मध्यप्रदेश भवन विकास निगम की देखरेख में सेंचुरी कंस्ट्रक्शन कंपनी, ग्वालियर द्वारा किया गया है। इसी कंपनी द्वारा बक्सवाहा में भी सांदीपनी स्कूल भवन का निर्माण किए जाने और वहां भी निर्माण संबंधी शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है।आरोप है कि बिजावर में भी अधूरे और घटिया निर्माण के बावजूद भवन को जबरन हैंडओवर कराया गया। हैंडओवर के लगभग तीन माह बाद ही भवन की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

कहीं क्रैक तो कहीं लगातार हो रहा पानी का रिसाव

स्कूल भवन के बाहरी प्रवेश द्वार पर लोहे के गेट के ऊपर बनाई गई एलिवेशन की दीवार में बड़ा क्रैक दिखाई दे रहा है। मल्टीपर्पज भवन की बीम और दीवारों से कई स्थानों पर पानी रिस रहा है। भवन में विनाइल फ्लोरिंग का कार्य भी नहीं किया गया है।दरवाजों की कुंडी छोटी होने के कारण हवा चलने पर दरवाजे खुल जाते हैं। स्कूल प्रबंधन जंजीर बांधकर काम चलाने को मजबूर है।ब्लॉक-बी के मुख्य प्रवेश द्वार की पहली मंजिल पर लगाई गई सीमेंट की जाली दो स्थानों से गिर चुकी है। गनीमत रही कि जिस समय जाली गिरी, वहां बच्चे मौजूद नहीं थे। अन्यथा गंभीर हादसा हो सकता था।

कमरों और छत पर भर रहा पानी

भवन के अंदर, बाहर और छत पर कई स्थानों पर पानी भरने की समस्या सामने आई है। कमरा नंबर 53 और 54 के बीच तथा कमरा नंबर 61 और 65 के ऊपर लैंटर नहीं डाला गया है। विभाग की ओर से इन हिस्सों को खुला रखने की बात कही जा रही है, लेकिन बारिश का पानी लगातार यहां जमा हो रहा है।पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण अब ड्रिल से छेद कर पानी निकालने की बात कही जा रही है। महिला शौचालय में अंदर की कुंडी तक नहीं लगाए जाने की बात भी सामने आई है।स्कूल भवन के कई कमरों में पंखे काम नहीं कर रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली के तार लटक रहे हैं। इनमें करंट होने की स्थिति में विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए हादसे का खतरा बना हुआ है।स्कूल के गार्ड रूम सहित कई कमरों में निर्माण एजेंसी द्वारा सामान रखा गया है। रैंप पर भी सामान भरा पड़ा है। बच्चों के खेलने के लिए लाई गई सामग्री खुले मैदान में पड़ी है, जिसे अब तक व्यवस्थित तरीके से स्थापित नहीं किया गया है।

कमियां दूर कराने की मांग पर स्टाफ को पढ़ाई पर ध्यान देने की नसीहत!

स्कूल प्रबंधन द्वारा निर्माण एजेंसी से कमियां दूर कराने की मांग किए जाने पर ठेकेदार द्वारा कथित रूप से अपने प्रभाव का हवाला देते हुए स्कूल स्टाफ को पढ़ाई पर ध्यान देने की बात कहे जाने का आरोप है।इन तमाम परिस्थितियों के चलते स्कूल भवन की गुणवत्ता के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के भवन में इस तरह की कमियां सामने आने से निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

सहायक यंत्री ने भी माना—भवन में लीकेज और क्रैक की समस्या

जांच के बाद शिक्षा विभाग के सहायक यंत्री पीसी तिवारी ने कहा कि भवन में लीकेज की समस्या है। उन्होंने बताया कि जहां ब्लॉक और आरसीसी का काम हुआ है, वहां पूरे भवन में क्रैक दिखाई दे रहे हैं। इस संबंध में अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है।अब देखना यह होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है या फिर करोड़ों रुपये के इस भवन में सामने आई गंभीर कमियों को सुधार के नाम पर महज लीपापोती कर मामला शांत कर दिया जाएगा। विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल भवन का तकनीकी एवं स्वतंत्र परीक्षण कराकर दोषियों की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है।

इनका कहना है

किचन एरिया के पाइप में कहीं क्रैक था जिसके कारण जॉइंट से पानी नीचे आ रहा था भवन में कुछ कमियां है जिन्हें ठीक करने का कार्य किया जा रहा है।


निशांत तिवारी डीजीएम भवन विकास निगम छतरपुर।