भोपाल। शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा अब ऑफलाइन माध्यम से होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों के हित में बेहतर से बेहतर निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा शुक्रवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में की। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम से पहले एनसीसी कैडेट्स ने अतिथियों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। समारोह में प्रदेश के चयनित 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
शिक्षकों की मेहनत का सरकार करती है सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की गौरवशाली गुरुकुल एवं गुरु-शिष्य परंपरा दुनिया की प्राचीनतम परंपराओं में शामिल है। भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ मानवता के कल्याण के लिए कार्य किया है। तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों के माध्यम से प्राचीन भारत ने विश्वभर के विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की।
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के पीछे गुरुजनों का महत्वपूर्ण योगदान है। देश का नक्शा कागज पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत कक्षाओं में शिक्षक बनाते हैं। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की सफलता में स्वयं से अधिक आनंद और गर्व महसूस करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षकों की मेहनत का सम्मान करती है। बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में बड़ी संख्या में शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थी मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करते हैं। यह उपलब्धि शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम का परिणाम है।
गुरुओं ने भगवान को भी तराशा
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने वहां 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। महर्षि सांदीपनि ने अपने शिष्य में भविष्य का पुरुषार्थ और पराक्रम देखकर उन्हें जगद्गुरु की उपाधि दी।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने बाल्यकाल में श्रीराम और लक्ष्मण के पराक्रम को पहचाना तथा उन्हें अपने साथ ले गए। गुरु के मार्गदर्शन ने श्रीराम के व्यक्तित्व को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में प्रदेश के 33 शिक्षकों का सम्मान किया गया है। भारत के दूसरे राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक और माता-पिता बच्चों को ज्ञान के साथ संस्कार देकर जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। इसे वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप विकसित एवं नवाचारपूर्ण बनाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने शिक्षकों से विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को सहनशील बनाना जरूरी है। मानसिक परेशानी से जूझ रहे बच्चों को प्यार और समझदारी के साथ संभालने की जरूरत है, ताकि वे गलत कदम न उठाएं।
विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका
स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षक दिवस गुरुजनों के सम्मान का अवसर है। देश की युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने में अभिभावकों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में भी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कई शिक्षक अपने वेतन का हिस्सा तक विद्यालयों के विकास में लगाते हैं और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने के लिए समर्पित रहते हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार कानूनी एवं अन्य बाधाओं को दूर करते हुए शिक्षकों की बेहतरी के लिए प्रयास कर रही है। विकसित भारत @2047 के संकल्प को पूरा करने में प्रदेश के शिक्षकों की अहम भूमिका होगी।
इन शिक्षकों का हुआ सम्मान
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिवलाल दांगी, धन्नालाल बिसेन, रीतेश कुमार पथाड़े, सुखनंदन साहू, नरेंद्र कुमार भारद्वाज, ओम प्रकाश विश्वकर्मा, महेंद्र सिंह ठाकुर, राकेश कुमार गुप्ता, शिखा शर्मा, लोकेंद्र सिंह पंवार, ज्योति पाठक, राकेश कुमार वर्मा, सुरेश चंद्र सोनी, शर्मिला उपाध्याय, रीना देवी कटरे, हेमंत कुमार वैद्य, राकेश द्विवेदी, सीमा परमार, पूनम मिश्रा, बिहारीलाल प्रजापति, अरुण कुमार भादे, बलराम अहिरवार, मुकेश कुमार शर्मा, अरुण कुमार मित्तल, मुकेश प्रजापति, मनीष तिवारी, अजय कुमार मिश्रा, मुकेश नागर, राजेश महेश्वरी, मोहित कुमार गर्ग, पूजा पांडे, सतीश पांडे, श्वेता तिवारी, अजिता, शीला पटेल और भैरूलाल ओसारा को सम्मानित किया गया।
